हुनर को तराशने में कभी भी आड़े नहीं आता धर्म और जाति Dipraj Sarkar Saturday, October 27, 2018 मजहब कोई भी हो, उसका मकसद इंसान को इंसानियत का पाठ पढ़ाना ही है। शिक्षक कोई भी हो, उसका मकसद है उजियारा फैलाना। from Jagran Hindi News - news:national https://ift.tt/2z2SQTc