जन्नत की आरज़ू न रही, इंसान को खुदा होते देखा है... Dipraj Sarkar Saturday, October 20, 2018 ऐसी दुनिया में जहां सड़क पर तड़पते घायल को देख लोग आगे बढ़ जाते हैं। बेदर्द राहों पर दम तोड़ते विक्षिप्तों के लिए जहां किसी के दिल में कोई जगह नहीं। from Jagran Hindi News - news:national https://ift.tt/2Oyg0LZ