रोज 25 किलोमीटर की दौड़, पहनने को जूते नहीं, न पर्याप्त खुराक, पिता हैं मजदूर

कौशल्या को छत्तीसगढ़ में लोग उड़नपरी के नाम से ही बुलाते हैं। मौसम कोई भी हो, कौशल्या गांव के कच्चे रास्ते पर सुबह सात बजे से दोपहर दो बजे तक दौड़ती हैं।

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